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Thursday, March 7, 2019

keybord shortcut keys


                      keybord shortcut keys


 




आप अभी भी माउस का हि ज्यादा उपयोग करते हो कीबोर्ड का उपयोग केवल नाम टाइप करने या कूच टाइपिंग करने  के लिये हि करते हो तो चलो आज मै  आपको ऐसे 20 shortcut keys बताता हुं. जिसको जानने के बाद आप भी keybord master बन जावोगे।इससे आपका रुदबा अपने दोस्त,फमिली,रीस्तेदारो में बड जायेगा। तो चलो जानते है।


trick 1:- delete और backspac


delete और backspace क्या है। तो चलिये जानते है। 



backspace button से आप कोई भी type किया हुआ content पीछे से  मीटा सकते हो 

delete button से आप कोई भी type किया हुआ content आगे से मीटा सकते हो 


trick 2 :- undo the last action


 ctrl+z or alt + backspace 


trick 3:-redo the last action


ctrl+y or shift+alt+backspace 

 

trick 4:-  cut the selection and store on the clipbord


 

ctrl+x or shift+del


trick 5:-copy the selection and store in clipbord


ctrl+c or ctlr+ins


trick 6:-paste content of clipbord at cursor


ctrl+v or shift +ins

 

trick 7:-select all in focused cantrol or window


ctrl + a


trick 8:-print


ctrl +p

 

trick 9:- new browser window with same page as current


ctrl +N


trick 10 :-new folder


ctrl + shift +N

trick 11 :-applications menu


wind or ctrl +Esc


trick 12 :-lock desktop


wind + L

trick 13:- show desktop


wind + D

 

trick 14 :- minimize all windows


wind + M or

trick 15 :- maximize all windows


wind + shift +M


trick 16 :- rename object


 F2

trick 17 :-switch window (next/previous )



alt +tab or shift + alt +tab


trick 18 :-run any application


wind + R

trick 19 :-place computer into sleep mode


wind +X>U>S


trick 20 :-shutdown computer


wind + X>U>S

Wednesday, March 6, 2019

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                                     क्लीन इटिंग


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क्या है - पौष्टिक भोजन लेना और प्रोसेस्ड फूड को पुरी तरह से aquaid करणा हि क्लीन इटिंग है. इसे जीवन जिने का एक तरीका भी कहा जाता है.आप जो कुछ भी खाते है उसे प्राकृतिक रूप में खाते है.जैसे फल ,सब्जीया,अनाज,प्रोटीन और
हेल्दी फीट्स.अपनी डाइट से शंकर ,मैदा,प्रीजर्वेटीव,अनहेल्थी फीट्स पुरी तरह बाहर कर देते है .clean eating - healthy eating food list,diet plan,

 
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ये है फायदे
१) कैलरीज नही बडती है
२) डाइट में फायबर,प्रोटीन ,हेल्दी फेट,विटामिन और मिनरल्स  होते है
३) इम्युनीटी बड जाती है
४) पेट साफ होता है
५) स्कीन पर ग्लो आता है ,बाल मजबूत होते है और नाखून चमकते है
६) वजन कम हो जाता है
७) ज्यादा उर्जा महसूस होती है
८) दिमाग शांत बना राहता है
९) ब्लोटिंग कि समस्या नही होती
१०) निंद अच्छी आती है
११) तणाव कम हो जाता है
१२) स्फुर्थी से काम होता है
१३) मोडर्ण बिमारी से बचते है
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क्लीन ईटिंग में ये सब भी शामिल

१) वेजीस -ब्रोकली,पालक,गोभी,शकरकंद,मुली,ककडी,टमाटर,अदरक,लहसून,प्याज,स्प्राउटस
२) फ्रूटस - सेब,स्ट्राबेरी,संतरा,मौसंबी,अंगूर,टरबूज,पपीता,केला,पाईअप्पल,
३) नॉन -डेरी मिल्क - आमंड मिल्क,स्वाय मिल्क,कोकोनट,और राइस मिल्क
४) नट्स और सीड्स - वालनट,आमंड,चिया,पिस्ता, मेलन

क्लीन इटिंग के दौरान इन्हे खाणे से बचना चाहिये -
दही,चीज,पास्ता,ड्रिंक्स,कार्बोनेटेड बिवरेजेस,डाइट सोडा,फ्राइज

 
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सावधानिया

* क्लीन इटिंग को हेल्थी इटिंग माने
* आरगेनिक खाणे के अलावा कच्चा,ग्लुटन फ्री,डेरी फ्री खाना सामील हो
* क्लीन इटिंग में सफल नही हो पा रहे है,तो उदास या परेशान होने कि जरुरत नही
* क्लीन इटिंग,हेल्थी इटिंग का हि हिस्सा है.यह लाइफस्टांइल कोनसेप्त है जिसे जिम्मेदारी के साथ खाना चाहिये.अच्चे खाणे का चुनाव करणा जरुरी है.लोकल फल और सब्जीया ज्यादा ले. ट्रान्स फीट्स से पुरी तरह दुरी बना ले.clean eating - healthy eating food list,diet plan,

 

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                            Dubai(UAE)



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दुबई अरबी संयुक्त अरब अमिराती (UAE)कि सात अमिरातो में से एक है यह फारस कि खाडी के दक्षिण में अरब प्रायद्विप पर स्थित है दुबई नगर पालिका को अमीरात से अलग बताने के लिए कभी कभी दुबई राज्य बुलाया जाता है। दुबई, मद्य पूर्व के एक वैश्विक नगर तथा व्यापार केन्द्र के रूप में उभर कर सामने आया है। लिखित दस्तावेजों में इस शहर का अस्तित्व संयुक्त अरब अमीरात के गठन से 150 साल पहले होने का जिक्र है।

दुबई का कानून 


दुबई अन्य अमीरातों के साथ कानून, राजनीति, सैनिक और आर्थिक कार्य एक संघीय ढांचे के भीतर साझा करता है। हालांकि प्रत्येक अमीरात में नागरिक कानून लागू करने और व्यवस्था और स्थानीय सुविधाओं के रखरखाव जैसे कुछ कार्यों पर क्षेत्राधिकार है। दुबई की आबादी सबसे ज्यादा है और यह क्षेत्रफल में अबू धाबी
के बाद दुसरी सबसे बडी अमिराती है  दुबई और अबू धाबी ही सिर्फ दो अमीरात है जिनके पास देश की विधायिका अनुसार राष्ट्रीय महत्व के महत्वपूर्ण मामलों पर प्रत्यादेश शक्ति का अधिकार है। दुबई पर 1833 से अल माकतौम वंश ने शासन किया है। इसके मौजूदा शासक मोहम्मद बिन रशीद अल माकतौम संयुक्त अरब अमीरात के प्रधानमंत्री और उप राष्ट्रपति भी है।

मुख्य पर्यटन 


अमीरात का मुख्य राजस्व पर्यटन, जायदाद और वित्तीय सेवाओं से आता है।दुबई की अर्थव्यवस्था मूलतः तेल उद्योग पर निर्मित है, वर्तमान में 80 अरब अमेरिकी डॉलर (2009) की अमीराती अर्थव्यवस्था में पेट्रोल तथा प्राकृतिक गैस का राजस्व योगदान 6% (2006) से कम है। संपत्ति और निर्माण ने 2005 में अर्थव्यवस्था में वर्तमान के बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य में तेजी से पहले 22.6% का योगदान दिया .

दुबई ने कई अभिनव बड़ी निर्माण परियोजनाओं और खेल आयोजनों के माध्यम से दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। सबका ध्यान आकर्षित होने के साथ ही एक वैश्विक शहरऔर व्यापार केन्द्र के रूप में उभरने की वजह से दुबई में श्रम और मानव अधिकारों से जुड़े कर्मचारियों मुख्यतः दक्षिण एशियाई कर्मचारियों से संबंधित मुद्दे प्रकाश में आये हैं

 
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वूत्पत्ती 


1820 में, दुबई को ब्रिटिश इतिहासकारों द्वारा अल वस्ल (Al Wasl) के रूप में उल्लिखित किया गया था। संयुक्त अरब अमीरात या उसके घटक अमीरात के सांस्कृतिक इतिहास से संबंधित कुछ अभिलेख क्षेत्र की मौखिक परंपरा के दर्ज होने और लोककथाओं व मिथको के आगे बढ़ने की वजह से मौजूद हैं . शब्द दुबई की मूल भाषा के बारे में भी विवाद रहे हैं, कुछ लोगों का मानना है कि यह फारसी भाषा से उत्पन्न हुआ है, जबकि कुछ का मानना है कि अरबी इस शब्द की मूल भाषा है।

फेडेल हन्धाल (Fedel Handhal) जो सयुंक्त अरब अमीरात के इतिहास और संस्कृति के शोधकर्ता है, के अनुसार शब्द दुबई का मूल शब्द दाबा (Daba) (यादुब ((Yadub) का एक व्युत्पन्न) से आया हो सकता है, जिसका मतलब रेंगना होता है। यह शब्द हो सकता है कि दुबई खाड़ी के भीतरी प्रवाह के संदर्भ में हो सकता है जबकि कवि और विद्वान अहमद मोहम्मद ओबैद भी इसी शब्द को माध्यम बताते हैं, लेकिन उनके अनुसार इसका अर्थ tiddi है.dubai hotel kya hai government

इतिहास 


दक्षिण- पूर्वी अरब प्रायद्वीप की इस्लाम से पूर्व की संस्कृति के बारे में काफी कम जानकारी है सिवा इसके कि कई प्राचीन नगरों के क्षेत्र पूर्वी और पश्चिमी दुनिया के बीच के व्यापार केंद्र थे। एक प्राचीन सदाबहार दलदल के अवशेष जो 7,000 साल पुराने है, दुबई इंटरनेट सिटी (Dubai Internet City) की सीवर लाइन के निर्माण के दौरान पाये गए . यह क्षेत्र 5,000 साल पहले समुद्र तट पीछे हट जाने से रेत से ढका हुआ था और शहर के वर्तमान समुद्र तट का एक हिस्सा बन गया था।
इस्लाम के पहले यहाँ के लोग बजीर (Bajir) (या बजर) की उपासना करते थे।

बैज़न्तिन (Byzantine) और सासानियन (Sassanian) (फारसी) साम्राज्य ने अवधि की महान शक्तियों का गठन किया और ज्यादा क्षेत्र को सासानियन नियंत्रित करने लगे . इस क्षेत्र में इस्लाम के प्रसार के बाद, उमय्यद कालिफ (Umayyad Caliph), पूर्वी इस्लामी दुनिया के, ने दक्षिण-पूर्वी अरब पर हमला कर दिया और सासानियन को बाहर कर दिया . अल-जुमायरा (जुमेरह) के क्षेत्र में दुबई संग्रहालय की खुदाई में उमय्यद अवधि की कई कलाकृतियाँ पायीं गई है।

दुबई का सबसे पहले का उल्लेख 1095 में दर्ज़ है, एन्डालुसियन - अरब (Andalusian-Arab) भूगोलिक अबु अब्दुल्ला अल-बकरी की "बुक ऑफ़ गेओग्राफी" (Book of Geography) में . वेनिस के मोती व्यापारी गस्पेरो बल्बी (Gaspero Balbi) ने 1580 में इस इलाके का दौरा किया और दुबई (डिबई) का उल्लेख इसके मोती उद्योग के लिए किया।दुबई के शहर के दस्तावेज अभिलेख केवल 1799 के बाद से ही मौजूद हैं .

१९ वी सदि 


19 वीं सदी के शुरू में, बनी यास (Bani Yas) वंश के अल अबू फालसा परिवार (हाउस अल-फालासी) ने दुबई की स्थापना की है, जो 1833 तक अबू धाबी पर निर्भर था।8 जनवरी 1820 को, दुबई और इस क्षेत्र में अन्य शेखों ने ब्रिटिश सर्कार के साथ "जनरल समुद्री शांति संधि" (General Maritime Peace Treaty) पर हस्ताक्षर किये .1833 में बनी यास जनजाति के अल मकतौम वंश (हाउस अल-फालासी के वंशज) ने अबू धाबी का समझौता छोड़ दिया और बिना विरोध के अबू फासला वंश से दुबई को ले लिया

दुबई 1892 के 'विशेष समझौते" द्वारा यूनाइटेड किंगडम के संरक्षण के अंतर्गत आ गया जिसमे ब्रिटेन ने दुबई की ओटोमन साम्राज्य से रक्षा की सहमति दी 1800 के दौरान शहर में दो बार प्रलय आई . पहला, 1841 में बुर दुबई इलाके में चेचक महामारी जिसने इसके निवासियों को डिरा के पूर्व में शरण लेने को मजबूर कर दिया . और फिर, 1894 में, डिरा में एक आग लगी जिसमे कई घर जल गए .[18] हालांकि, शहर की भौगोलिक स्थिति ने इस क्षेत्र के आसपास से व्यापारियों और सौदागरों को आकर्षित करना जारी रखा . दुबई के अमीर ने विदेशी व्यापारियों को आकर्षित करने के लिए उत्सुक था और उसने व्यापार कर को कम कर दिया जिसने व्यापारियों को शारजाह (Sharjah) और बन्दर लेंगेह (Bandar Lengeh) से खीच लिया जो उस समय इस क्षेत्र के मुख्य व्यापार केन्द्र थे।

 
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२० वी सदि


दुबई की ईरान से भौगोलिक निकटता ने इसे एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। दुबई का शहर विदेशी व्यापारियों के लिए एक महत्वपूर्ण बंदरगाह था, मुख्यतः ईरान के व्यापारियों के लिए, जिसमे कई अंततः इसी शहर में बस गए . दुबई 1930 के दशक तक अपने मोती निर्यात के लिए जाना जाता था पर विश्व युद्घ 1 से यह उद्योग क्षतिग्रस्त हो गया था और बाद में 1930 के दशक में विश्व्यापी मंदी से यह फिर से क्षतिग्रस्त हो गया . मोती व्यापार के पतन के साथ कई निवासी फारस की खाड़ी के अन्य भागों में चले गए .

अपनी स्थापना के बाद से ही दुबई अबु धाबी के अनुपात पर था। 1947 में, दुबई और अबु धाबी के उत्तरी क्षेत्र की साझा सीमा का विवाद युद्ध में बदल गयाब्रिटेन की मध्यस्तता और एक मध्यवर्ती सीमा जो रस हसियन (Ras Hasian) तट से दक्षिण पूर्व की ओर थी के परिणामस्वरूप दोनों से बीच एक अस्थायी युद्धस्तिथि विराम आ गया था।

अमीरात के बीच सीमा विवाद संयुक्त अरब अमीरात के गठन के बाद भी जारी रहा और 1979 में ही एक औपचारिक समझौते के बाद युद्ध समाप्त हुआबिजली, टेलीफोन सेवाओं और एक हवाई अड्डे दुबई में 1950 के दशक में स्थापित हुए जब ब्रिटिश अपने स्थानीय प्रशासनिक कार्यालयों शारजाह से दुबई ले गए 1966 में शहर ने कतर के नव स्वतंत्र देश के साथ फारस की खाड़ी रुपए के अवमूल्यन के बाद नै मौद्रिक इकाई कतर/दुबई रियाल की स्थापना कीउसी साल दुबई में तेल का पता चला जिसके बाद शहर ने अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों को रियायतें दी . तेल की खोज से विदेशी कर्मचारियों की एक बाढ़ सी आ गई जिसमे मुख्यतः भारतीय और पाकिस्तानी लोग थे। कुछ अनुमानों के अनुसार शहर की जनसँख्या 1968 से 1975 300% तक बढ़ गई थी।

पूर्व रक्षक ब्रिटेन के 1971 में फारस की खाड़ी छोड़ने के बाद 2 दिसम्बर 1971 को दुबई ने अबु धाबी और पांच अन्य अमीरात के साथ मिलकर UAE की स्थापना की 1973 में, दुबई ने अन्य अमीरातों के साथ मिलकर एक समान मुद्रा : संयुक्त अरब अमीरात दिरहम अपनाई . 1970 के दशक में, दुबई में तेल और व्यापार से उत्पन्न राजस्व में निरंतर बढोत्तरी होती रही, जबकि शहर में लेबनान के गृह युद्ध से भागे हुए आप्रवासियों की बाढ़ आ गयी थी।जेबेल अली बंदरगाह (दुनिया का सबसे बड़ा मानव निर्मित बंदरगाह) 1979 में स्थापित किया गया था। जफ्ज़ा (Jafza)(जेबेल अली नि:शुल्क जोन) का बंदरगाह के आसपास निर्माण 1985 में विदेशी कंपनियों को अप्रतिबंधित श्रम आयात और पूंजी निर्यात प्रदान करने के लिए किया गया था।

फारस कि खाडी


के 1990 के युद्ध का शहर पर बड़ा प्रभाव पड़ा . जमाकर्ताओं ने क्षेत्र में अनिश्चित राजनीतिक परिस्थितियों के कारण दुबई के बैंकों से भारी मात्रा में पूँजी वापस ले ली . बाद में 1990 के दशक में कई विदेशी व्यापारिक समुदाय - पहली बार कुवैत से फारस की खाड़ी युद्ध के दौरान और बाद में बहरीन से शिया अशांति के दौरान - ने अपने व्यापार को दुबई में स्थानांतरित कर दिया दुबई ने फारस की खाड़ी युद्ध के दौरान और बाद में 2003 इराक आक्रमण के दौरान सेना संबद्ध को जेबेल अली फ्री ज़ोन को ईंधन आधार के लिए इस्तेमाल करने दिया . फारस की खाड़ी के युद्ध के बाद बढ़ी हुई तेल की कीमतों ने दुबई को मुक्त व्यापार और पर्यटन पर ध्यान देना जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया।dubai hotel kya hai government

दुबई इंटरनेट

जेबेल अली मुक्त क्षेत्र की सफलता ने शहर को इस मॉडल की नकल कर नए मुक्त क्षेत्र के समूहों के विकास की अनुमति दी जिसमे दुबई इंटरनेट सिटी, दुबई मीडिया सिटी और दुबई मैरीटाइम सिटी भी शामिल है। बुर्ज अल अरब, दुनिया के सबसे बड़ा प्रथक होटल के निर्माण और साथ ही नये आवासीय गतिविधियों के निर्माण को पर्यटन के लिए दुबई के प्रचार के लिए इस्तेमाल किया गया . 2002 के बाद से निजी संपत्ति के विकास में वृद्धि ने दुबई के क्षितिजका विशाल परियोजनाओं, द पाल्म आइलैंड, द वर्ल्ड आइलैंड और द बुर्ज खलीफा के साथ पुनः निर्माण किया। हाल ही के मजबूत आर्थिक विकास ने उच्च मुद्रास्फीति को भी बढ़ावा मिला (11.2%, 2007 में जब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के खिलाफ मापा गया) जिसका एक कारण वाणिज्यिक और आवासीय किराए का दोहरीकरण भी माना जाता है

सरकार कि नितीया


दुबई सरकार एक संवैधानिक राजशाही ढांचे के भीतर संचालित होती है और अल मकतौम परिवार द्वारा 1833 के बाद से शासित है। मौजूदा शासक मोहम्मद बिन रशीद अल मकतौम संयुक्त अरब अमीरात के प्रधानमंत्री और सुप्रीम संघ परिषद् (SCU) के सदस्य भी है। दुबई 2 सत्र विधि के लिए 8 सदस्यों की संयुक्त अरब अमीरात की संघीय राष्ट्रीय परिषद (Federal National Council - FNC) जो सर्वोच्च संघीय वैधानिक संस्था है, में नियुक्ति करती है।दुबई नगर पालिका (डीएम) की स्थापना तत्कालीन शासक राशिद बिन सईद अल मकतौम ने 1954 में नगर नियोजन, नागरिक सेवाओं और स्थानीय सुविधाओं के रखरखाव के प्रयोजनों के लिए की थी।

डीएम की अध्यक्षता हमदान बिन राशिद अल मकतौम, दुबई के उप शासक द्वारा की जाती है और इसमें अनेक विभाग जैसे सड़क विभाग, योजना और सर्वेक्षण विभाग, पर्यावरण एवं जन स्वास्थ्य विभाग और वित्तीय मामलों के विभाग शामिल हैं.

सन् 2001 में दुबई नगर पालिका ने अपने वेब पोर्टल (दुबई.एई) द्वारा अपनी 40 शहरी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एक ई- सरकार परियोजना शुरू की . ऐसी 13 सेवाएँ अक्टूबर 2001 से शुरू की गई, जबकि कई अन्य सेवाएं भविष्य में चालू होने की आशा है।

 
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दुबई और रास अल खैमाह ही केवल अमीरात है जो संयुक्त अरब अमीरात की संघीय न्यायिक प्रणाली के अनुरूप नहीं हैं . अमीरात की न्यायिक अदालत हैं द कोर्ट ऑफ़ फर्स्ट इंस्टैंस, द कोर्ट ऑफ़ अपील और द कोर्ट ऑफ़ कैसशन . द कोर्ट ऑफ़ फिस्र्ट इंस्टैंस में सिविल कोर्ट होते हैं जो सभी नागरिकों के दावे सुनते है, अपराध न्यायालय, जो पुलिस की शिकायतों से जुड़े दावे सुनते है और शरिया कोर्ट जो मुसलमानों के बीच मामलों के लिए जिम्मेदार है। गैर मुसलमान शरिया कोर्ट के सामने प्रकट नहीं होते हैं . द कोर्ट ऑफ़ कैसशन अमीरात का सुप्रीम कोर्ट है और कानून के मामलों पर विवाद सुनता है।

दुबई पुलिस बल की स्थापना नैफ इलाके में 1956 में हुई और इसका कानून प्रवर्तन अधिकार क्षेत्र अमीरात है। यह बल मोहम्मद बिन रशीद अल मकतौम, दुबई के शासक की प्रत्यक्ष कमान के अधीन है। दुबई नगर पालिका शहर की स्वच्छता और मलजल बुनियादी सुविधाओं के प्रभारी भी हैं . शहर के तेज विकास ने इसके सीमित सीवेज उपचार के बुनियादी ढांचे को उसकी चरम सीमा तक खीच दिया है
संयुक्त अरब अमीरात के संविधान का अनुच्छेद 25 जाति, राष्ट्रीयता, धार्मिक विश्वासों या सामाजिक स्थिति के आधार पर सभी को सामान आचरण प्रदान करता है। हालाँकि, दुबई के 250,000 में से अनेक विदेशी मज़दूरों की स्तिथि को मानव अधिकार वॉच द्वारा "मानवीय से कम " वर्णित किया गया है।

NPR अनुसार श्रमिक "आम तौर पर एक कमरे में आठ रहते है और अपने वेतन का एक हिस्सा वे अपने परिवारों को, जिन्हें वे सालों नहीं देख पाते है, को भेजते है।" 21 मार्च 2006 को बुर्ज खलीफा निर्माण स्थल के श्रमिक जो बस के समय और काम की परिस्थितियों से परेशान थे, ने आन्दोलन कर दिया था जिससे कारों, कार्यालयों, कंप्यूटरों और निर्माण उपकरणों को हानि हुई थी।  वैश्विक वित्तीय संकट ने दुबई के श्रमिक वर्ग को नुक्सान पहुँचाया है, कई श्रमिकों को भुगतान नहीं किया जा रहा है और वे देश छोड़ने में भी असमर्थ है।dubai hotel kya hai government

दुबई में विदेशी नागरिकों के जुड़े न्यायिक सिद्धांतों को 2007 में रौशनी में लाया गया जब एलेक्जेंडर रॉबर्ट नामक एक 15 वर्षीय फ़्रांसिसी- स्विस नागरिक के साथ तीन स्थानीय लोगों द्वारा बलात्कार, जिसमे से एक एचआइवी पोसिटिव थाऔर हाल में ही प्रवासी मजदूर जिनमे से अधिकांश भारतीय थे जो बुरी मजदूरी और जीवन स्थितियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, के कैद जैसी घटनाओं को कथित रूप से छुपाने की कोशिश की गयी थी।वेश्यावृत्ति, जो कानून द्वारा अवैध है, सुस्पष्ट रूप से अमीरात में मौजूद है क्योंकि इसकी अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर पर्यटन और व्यापार पर आधारित है।dubai hotel kya hai government

अमेरिकन सेन्टर फॉर इंटरनेशनल पॉलिसी स्टडीज (AMC.PS) द्वारा किए गए एक शोध में पाया गया कि रूसी और इथियोपिया की महिलायें सबसे आम वेश्याओं हैं, साथ ही कुछ अफ्रीकी देशों की भी महिलाएं है, जबकि भारतीय वेश्याएं एक अच्छी तरह से आयोजित ट्रांस ओशियानिक वेश्यावृत्ति नेटवर्क का हिस्सा हैं.dubai hotel kya hai government

Tuesday, March 5, 2019

Ganeral insurance and Helth insurance



 

     Ganeral insurance and Helth insurance


 
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What is general insurance?


The fundamental goal of general insurance is to protect an individual against loss or damage of an asset. Continuing the above example, imagine that you finally decided to buy an SUV. The cost of the car is Rs 10 lakhs. This is a large sum of money and in case any damage occurs to the car, you could end up paying a lot of money towards repairs. A car insurance policy can help you avoid financial burden in case any damage occurs to your car.

Similarly, there are many other insurance policies such as insurance against theft, fire, accidents and loss of property. These come under general insurance.
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General insurance  or non-life insurance


eneral insurance  or non-life insurance policies, including automobile and homeowners policies, provide payments depending on the loss from a particular financial event.insurance is typically defined as any insurance that is not determined to be
life insurance.it is called property and casualty insurance in the united states and canada.non-life insurance in continental Europe.
in the United Kingdom,insurance is broadly divided into three areas:personal line,commercial line and London market.

The London market  insures large commercial risks such as supermarkets, football players and other very specific risks. It consists of a number of insurers, reinsurers, brokers and other companies that are typically physically located in the city london.lioyd of london is a big participant in this market.the
London market also participates in personal lines and commercial lines, domestic and foreign, through re-insurance.
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Type Of general insurance


General insurance can be categorised in to following:

1) Motor Insurance: Motor Insurance can be divided into two groups, two and four wheeled vehicle insurance.

2) Health Insurance: Common types of health insurance includes: individual health insurance, family floater health insurance, comprehensive health insurance and critical illness insurance.

3) Travel Insurance: Travel insurance can be broadly grouped into: individual travel policy, family travel policy, student travel insurance, and senior citizen health insurance.

4) Home Insurance: Home insurance protects a house and its contents.

5) Marine Insurance: Marine cargo insurance covers goods, freight, cargo, and other interests against loss or damage during transit by rail, road, sea and/or air.

6) Commercial Insurance: Commercial insurance encompasses solutions for all sectors of the industry arising out of business operations.

Health insurance


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What is health insurance?


On the other hand, health insurance is a specific type of insurance product that is designed to cover the cost of medical care. Everyone hopes to be as healthy as possible. However, sickness or personal injuries can come up at any time.

An office colleague, for example, who is suffering from a viral infection, could pass on the illness to you without your knowledge.



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Pakistan


The military phase of the strike back against Pakistan-based terror is over and efforts are now on to step up diplomatic pressure on Islamabad. A fresh initiative is on by the permanent members of UN Security Council to blacklist Jaish-e Mohammed chief Masood Azhar and India is directing all its efforts in that direction. Also, if there's another terrorist attack from Pakistan, all options are on the table, sources said.

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When it comes to naval power, India is much stronger. It has 16 submarines, 14 destroyers, 13 frigates, 106 patrol and coastal combatant vessels, and 75 combat-capable aircraft.

Compare this to Pakistan which has 9 frigates, 8 submarines, 17 patrol and coastal vessels, and 8 combat-capable aircraft.ents from sources came as Pakistan claimed that India has kept up its attempts to use force and that an Indian submarine had entered its waters.

pakistan


Rubbishing Islamabad's claims, sources said Pakistan was trying to "deviate attention" by suggesting that India is continuing to threaten them. Pakistan's claim today that they shot down a Sukhoi, is a "total lie", a source said.

"India also reaching out to other countries outside UNSC... telling the international community if this is Naya Pakistan with a Naya Soch, we expect to see action," an official said. A "New Pakistan with a new ideology", was a phrase coined by Pakistan Prime Minister Imran Khan.

AMRAAM


Under the diplomatic initiative, India has also shared evidence with the US on the AMRAAM (Advanced Medium-Range Air-to-Air Missile) missiles fired by Pakistan when a packet of its aircraft, including F16 fighter jets, had violated India's airspace. Pakistan had obtained the missiles from the US on condition that they would be used against terrorists, sources have said.

It is also evidence that Pakistan had indeed targeted India's military facilities, sources said. India has made it clear that its February 26 airstrike has been on the biggest Jaish-e-Mohammed terrorist training camp in Pakistan's Balakot was "pre-emptive" and "non-military".

Abhinandan


While giving chase to the Pakistani planes, Wing Commander Abhinandan Varthaman, who shot down an F-16, had been captured. Sources also brushed away Pakistan's claim that they were releasing the pilot as a peace gesture. "Considerable pressure had been brought on them by the P5 nations," a source said.

Three of the P5 nations are supporting have taken up the initiative to blacklist Masood Azhar. With the deadline for objections being set at February 16, all eyes are on China, which has blocked India's efforts in this direction repeatedly.

 

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According to the International Institute for Strategic Studies, India in 2018 allocated Rs 4 trillion rupees ($58 billion), or 2.1 per cent to support its 1.4 million active troops.

Pakistan, on the other hand, spent 1.26 trillion Pakistani rupees ($11 billion), about 3.6 per cent of its GDP, on its 653,800 troops. It also received $100 million in foreign military assistance in 2018.
Additionally, estimates from the Stockholm International Peace Research Institute showed that the Pakistani military accounted for 16.7 per cent of government spending in 2017. In comparison, India’s spending as a percentage of its government expenditure was 9.1 per cent for the same period.pakistan news

India has nine types of operational missiles, including the Agni-3 with a range of 3,000 km to 5,000 km. Pakistan's missile programme, which has been built with Chinese assistance, includes mobile short-and medium-range weapons that can reach any part of India.
Both countries are nuclear-capable, with India having 130-140 warheads whereas Pakistan has 140 to 150.

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ARMY


The Indian Army is 1.2 million strong. According to the International Institute for Strategic Studies, the Indian Army also has in its arsenal 3,565 battle tanks, 3,100 infantry fighting vehicles, 336 armoured personnel carriers and 9,719 pieces of artillery.pakistan news

With 5,60,000 troops, the Pakistani army is smaller in size and is backed by 2,496 tanks, 1,605 armoured personnel carriers, and 4,472 artillery guns, including 375 self-propelled howitzers.

 
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AIR FORCE


on the other hand, has 425 combat aircraft.

However, there are serious concerns about India's fighter jet fleet -- which still has older Russian jets such as the MiG-21, the one flown by Wing Commander Abhinandan Varthaman when he was shot down last week.pakistan news

Pakistan's fleet consists of Chinese-origin F-7PG and American F-16 Fighting Falcon jets.

The IISS also noted that Pakistan has seven airborne early warning and control aircraft, three more than India.pakistan news

 
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NAVY


When it comes to naval power, India is much stronger. It has 16 submarines, 14 destroyers, 13 frigates, 106 patrol and coastal combatant vessels, and 75 combat-capable aircraft.

Compare this to Pakistan which has 9 frigates, 8 submarines, 17 patrol and coastal vessels, and 8 combat-capable aircraft.pakistan news

 

what is SEO ,crawling,Indexing,Ranking,on page seo,off page seo,white hat seo,black hat seo


                 SEO क्या है सिखे हिंदी में 


 

google seo

 

learn in english click hare


Blogging और internet की दुनिया इस तीन शब्द के word “SEO” के ऊपर निर्भर करती है। बहुत बड़ी-बड़ी कंपनियां जो अपने Proudct और servies online बेचती है। वह अपने लाखों रुपये सिर्फ seo पर ख़र्च करती है।

SEO क्या है


अगर आपने भी इसका नाम बार-बार सुना है या कही लिखा हुआ देख है या फिर आप internet और Blogging में नये है तो यह word आपको बार-बार सुने को मिलता है।

आज हम आपको बिल्कुल simple शब्दों में इसके बारे में बताने वाले है। अगर आप इस Post को एक बार ध्यान से पढ़ ले तो आप आसानी से seo के बारे में जान जायगे।

SEO जिसका सीधा संबंध search engine से होता है। seo एक प्रकार से search engine में अपनी   blog, website को Top पर लाने के Rules होते है ताकि हमारी blog, website पर traffic increase हो सके। अगर आप इन Rules को follow करते है तो आपकी website search engine में first Page पर show होती है।

SEO


Website को first Page पर लाना इसलिए जरूरी होता है क्योंकि अधिकतर लोगों first page पर आने वाली website पर ही visit करना पसंद करते है और इसके लिए हमे Seo को follow करना पड़ता है।

कोई भी कंपनी या व्यक्ति अपनी website इसलिए बनाता है ताकि वह अपनी service और Product बेच सके परन्तु अगर उसकी website पर traffic यानी लोग ही visit नही करते तो वह अपने product कैसे बेचेंगे। इसलिए हमें अपने वेबसाइट को first page पर लाने की लिए SEO करणा पड़ती है। जिसे हमारी website पर traffic increase हो।

Websites पर traffic increase होने से हमारी online earning बडती है साथ ही website की value search engine में increase हो जाती है जिसे website की Ranking बढ़ती है।

seo for website

example - 


Search engine optimization बिल्कुल traffic Rules की तरह होता है। जैसे traffic को सुचारू रूप से चलाने के लिए हमे Roadmap की आवश्यकता होती है ताकि लोगों को किसी समस्या का सामना न करना पड़े और वह जल्दी से अपना सही रास्ता चुनकर अपने Target तक पहुच सकते। ठीक उसी प्रकार Seo भी एक search engine Traffic Rules है।

ताकि जब कोई कुछ भी सर्च कर उसे जल्दी से सही जानकारी मिले। इसके लिए search engine का Roadmap होता है जिसे SEO कहते है Seo और traffic rules दोनों ही लोगो के लिए काम करते है। ताकि हमारी journey अच्छी रहे। जैसे अगर आप what is SEO सर्च कर सकते है लेकिन जो Result आते है वह किसी और चीज के बारे में है तो आपको बार-बार search करना पड़ेगा जिसका मतलब है कि आपकी journey और user experience ख़राब रहा।

इसलिए google search engine अपने user experience बढ़ने के लिए Seo factor का इस्तेमाल करता है ताकि उनके user को fastly और correctly information दे सके।

हर search engine के अपने seo factor होते है। आज के समय मे Google सबसे बड़ा search engine है जो पूरी दुनिया मे सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है। google लगभग 200 Seo factor पर काम करता है।

अगर आप Seo को एक लाइन में समझना चाहते है तो आप यह जान ले कि google वही content को पसंद करता है जिसे user पढ़ना पसन्द करते है। जिसे वह content अपने आप first page पर चला जाता है। और अगर पसंद नही करते तो धीरे- धीरे नीचे चला जाता है। यह google seo का सबसे important factor है।

search engine क्या होता है


what is seo and how it work


सबसे पहले आपके लिए यह जाना बहुत जरूरी है कि search engine क्या है। search engine एक ऐसा search engine एक ऐसा alogorithum है जो हमारे द्वारा internet पर search की गई जानकारी की सही information देने का काम करता है इसके लिए वह अपने डेटा base में मौजूद जानकारी को fastly crawl, index और Rank देता है जिसे SNRP (Search engine Result Page) कहते है। किसी भी Page को search Result में Top पर लाने के लिए Seo की बहुत बड़ी भूमिका होती है। google,Yahoo, Bing यह सब search engine है।
आज के समय मे google search engine सबसे ज्यादा popular है क्योंकि अगर हमे कुछ भी सर्च करना होता है तो हम google search engine का इस्तेमाल करते है। दुनिया मे 70 Precent लोग google का use करते है।

google search


क्या आप जानते है जब आप google पर कुछ भी search करते है तो google आपको best Result देने के लिए 200 factor का इस्तेमाल करता है जो article google के इन मापदंडों के अनुसार होता है वही आपको google के first page पर show होता है। जिसे आपको बिल्कुल सही जानकारी मिल सके।
search engine कैसे काम करता है.

जैसे अगर आप search करते हो what is SEO तो Search engine पहले से ही crawl और index की हुई Ranking list को आपके सामने ले आता है। जिसे search engine के bots और spider लगातार 24 hours crawl और index करके अपनी Ranking list बना लेते है। और जैसे ही आप कुछ सर्च करते है तो वह आपको search engine Result Page(SERP) पर दिखाई देती है।

वैसे तो सभी search engine के काम करने की अलग अलग technic होती है। लेकिन हर search engine तीन step में काम करता है।

१) Crawling 
२)Indexing
3)Ranking

Crawling


जब search engine Bots और spider आपके page को खोजकरउसे scanकरते है तो उसे Crawlingकहते है

 
crawling,seo crawling

 

indexing


आपके pageके  contentऔर  quality के आधार पर आपको search engine में index किया जाता है

Ranking


किसी page को search engine के मापदान्डो के अनुसार search result में उसकी जगे को ranking कहते है

अब आप समझ चुके होंगे कि search engine क्या है और कैसे काम करता है। इसलिए अब आपको search engine optimise समझने में आसानी होगी। क्योंकि seo का सीधा संबंध search engine से होता है।

TYPE OF SEO


1)on page SEO
2)off page SEO

 
on page seo,off page seo

on page SEO
Search engine optimization के दो importent factor है। सबसे पहले हम बात करते है on page Seo के बारे में क्योकि यह website पर organic traffic increase करने का सबसे important factor है।

अपनी website को search engine optimize के अनुसार setup करने के लिए जो काम उस पर किया जाता है on page seoकहते हैकरने से आपकी organic traffic increase होती है। google पर keyword search करके direct आपकी website पर आना organic traffic कहलाता है।

On page SEO


के बहुत सारे factor होते है जिनकी help से आप अपनी website को on page के लिए optimize कर सकते है हम आपको कुछ common factor बताने वाले है।

* website design

*site speed

* Website Structure

* Website Favicon

* Mobile-friendly Website

* Title Tag

* Meta Description

* Keyword Density

* Image Alt Tag

* URL Structure

* Internal Links

* Highlight Important Keyword

* Use Heading Tag

* Post-Good Length

* Google Sitemap

* Check Broken Links

* SEO Friendly URL

* Google Analytics

* Social Media Button

* HTML Page Size

* Clear Page Cache

* Website security HTTPS etc

off page SEO


अपनी website और Post को search engine में Rank करने के लिए उसके link को internet पर promote करना off page SEO कहते है
जब आपकी post को internet पर promote और share किया जाता है तो इसे search engine को कुछ signal जाते है। जिसे search engine उस Post की Ranking increase कर देता है।

Off Page SEO करने के बहुत सारे तरीके है। जिनकी help से आप अपनी Post की Ranking increase करके अपनी website का Traffice बढ़ा सकते है। हम आपको कुछ off Page करने के तरीके बता रहे है।
social networking sites
facebook,whatsaap,massenger,twitter,instagram

Monday, March 4, 2019

article 370 - article 35A full explaination in hindi


article 370 & article 35A


 

article 370 & article 35A


14 फरवरी को दक्षिण कश्‍मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद देश में धारा 370 पर भी बहस छिड़ गई है। कई लोगों का कहना है कि राज्‍य में लागू धारा 370 को अब हटा देना चाहिए। वर्ष 2014 में राज्‍य में  हुए चुनावों के समय से ही इस पर बहस चल रही है। इस कानून के तहत जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है और साथ ही यहां का राष्ट्रध्वज अलग होता है। जानिए इस तरह की ही कुछ और खास बातों पर एक नजर।

आईये आपको बताते हैं कि धारा 370 है क्या? जो देश के विशेष राज्य कश्मीर में लागू है।












जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज
जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज

1. जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है ।

2. जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग होता है ।

3. जम्मू - कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है जबकी भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है ।
4. जम्मू-कश्मीर के अन्दर भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं होता है ।

5. भारत के उच्चतम न्यायलय के आदेश जम्मू - कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं ।

6. भारत की संसद को जम्मू - कश्मीर के सम्बन्ध में अत्यंत सीमित क्षेत्र में कानून बना सकती है ।

7. जम्मू कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जायेगी। इसके विपरीत यदि वह पकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू - कश्मीर की नागरिकता मिल जायेगी।

8. धारा 370 की वजह से कश्मीर में RTI लागू नहीं है, RTE लागू नहीं है। CAG लागू नहीं होता। ...। भारत का कोई भी कानून लागू नहीं होता।

9. कश्मीर में महिलावो पर शरियत कानून लागू है।

10. कश्मीर में पंचायत के अधिकार नहीं।

11. कश्मीर में चपरासी को 2500 ही मिलते है।

12. कश्मीर में अल्पसंख्यको [ हिन्दू- सिख ] को 16 % आरक्षण नहीं मिलता ।

13. धारा 370 की वजह से कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते है।


14. धारा 370 की वजह से ही पाकिस्तानियो को भी भारतीय नागरीकता मिल जाता है । इसके लिए पाकिस्तानियो को केवल किसी कश्मीरी लड़की से शादी करनी होती है।

कैसे हटाइ जा सकती है धारा 35A











जम्मू-कश्मीर
जम्मू-कश्मीर



जम्‍मू-कश्‍मीर में धारा 35A हटाने की बात भर पर बवाल मचा हुआ है. कट्टरप‍ंथयों के साथ-साथ राजनीतिक दलों को भी ये बात पच नहीं रही है. नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष और लोकसभा सांसद फारूक अब्दुल्ला ने तो यहां तक कह दिया है कि संविधान की धारा 35A को रद्द किए जाने पर 'जनविद्रोह' की स्थिति पैदा होगी. आप भी जानिए आखिर क्‍या है ये धारा, जिस पर हो रहा है इतना विवा

 

संविधान में जिक्र नही


आपको जानकर हैरानी होगी कि संविधान की किताबों में न मिलने वाला अनुच्छेद 35A जम्मू-कश्मीर की विधान सभा को यह अधिकार देता है कि वह 'स्थायी नागरिक' की परिभाषा तय कर सके. दरअसल, संविधान के अनुच्छेद 35A को 14 मई 1954 में राष्ट्रपति के आदेश से संविधान में जगह मिली थी. संविधान सभा से लेकर संसद की किसी भी कार्यवाही में, कभी अनुच्छेद 35A को संविधान का हिस्सा बनाने के संदर्भ में किसी संविधान संशोधन या बिल लाने का जिक्र नहीं मिलता है. अनुच्छेद 35A को लागू करने के लिए तत्कालीन सरकार ने धारा 370 के अंतर्गत प्राप्त शक्ति का इस्तेमाल किया था.

article 370 & article 35A


क्या है पुरी धारा


अनुच्छेद 35A से जम्मू-कश्मीर सरकार और वहां की विधानसभा को स्थायी निवासी की परिभाषा तय करने का अधिकार मिलता है. इसका मतलब है कि राज्य सरकार को ये अधिकार है कि वो आजादी के वक्त दूसरी जगहों से आए शरणार्थियों और अन्य भारतीय नागरिकों को जम्मू-कश्मीर में किस तरह की सहूलियतें दे अथवा नहीं दे.

कब लगायी गयी थी


14 मई 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था. इस आदेश के जरिए भारत के संविधान में एक नया अनुच्छेद 35A जोड़ दिया गया.
नही खरीद सकते जमीन
बहुत कम लोगों को पता है कि अनुच्छेद 35A, धारा 370 का ही हिस्सा है. इस धारा की वजह से कोई भी दूसरे राज्य का नागरिक जम्मू-कश्मीर में ना तो संपत्ति खरीद सकता है और ना ही वहां का स्थायी नागरिक बनकर रह सकता है.

जम्मू काश्मीर का अलग संविधान


1956 में जम्मू कश्मीर का संविधान बनाया गया था. इसमें स्थायी नागरिकता को परिभाषित किया गया है.

इस संविधान के मुताबिक स्थायी नागरिक वो व्यक्ति है जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या फिर उससे पहले के 10 वर्षों से राज्य में रह रहा हो. साथ ही उसने वहां संपत्ति हासिल की हो.

लाडकियो के क्या अधिकार


अनुच्छेद 35A के मुताबिक अगर जम्मू-कश्मीर की कोई लड़की किसी बाहर के लड़के से शादी कर लेती है तो उसके सारे अधिकार खत्म हो जाते हैं. साथ ही उसके बच्चों के अधिकार भी खत्म हो जाते हैं.

धारा हट्टाने कि मांग क्यो हो रही है


इस अनुच्छेद को हटाने के लिए एक दलील ये दी जा रही है कि इसे संसद के जरिए लागू नहीं करवाया गया था. दूसरी दलील ये है कि देश के विभाजन के वक्त बड़ी तादाद में पाकिस्तान से शरणार्थी भारत आए. इनमें लाखों की तादाद में शरणार्थी जम्मू-कश्मीर राज्य में भी रह रहे हैं. जम्मू-कश्मीर सरकार ने अनुच्छेद 35A के जरिए इन सभी भारतीय नागरिकों को जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासी प्रमाणपत्र से वंचित कर दिया. इन वंचितों में 80 फीसद लोग पिछड़े और दलित हिंदू समुदाय से हैं. इसी के साथ जम्मू-कश्मीर में विवाह कर बसने वाली महिलाओं और अन्य भारतीय नागरिकों के साथ भी जम्मू-कश्मीर सरकार अनुच्छेद 35A की आड़ लेकर भेदभाव करती है.


 

लोग सुप्रीम कोर्ट तक गये थे


बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में लोगों ने शिकायत की थी कि अनुच्छेद 35A के कारण संविधान प्रदत्त उनके मूल अधिकार जम्मू-कश्मीर राज्य में छीन लिए गए हैं, लिहाजा राष्ट्रपति के आदेश से लागू इस धारा को केंद्र सरकार फौरन रद्द किया जाए.

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   jio ने इस ऑफर को बडाया




Jio cashback offer last date: Reliance Jio ने अपने 'मोर देन 100 पर्सेंट कैशबैक' ऑफर की तारीख को एक बार फिर से बढ़ा दिया है। इससे पहले Jio cashback offer की अंतिम तारीख 15 मार्च थी। Reliance Jio ने एक मार्च को इस ऑफर की डेट को 15 मार्च तक बढ़ा दिया था। अब Jio cashback offer को 31 मार्च, 19 तक बढ़ा दिया गया है। Jio की आधिकारिक वेबसाइट www.jio.com पर इस ऑफर की जानकारी दी गई है।




Reliance Jio


Reliance Jio के इस कैशबैक ऑफर में ग्राहकों को 700 रुपये तक का कैशबैक का फायदा उठाने का मौका मिल रहा है। जियो कैशबैक ऑफर में जो जियो यूजर 398 या फिर इससे अधिक का रिचार्ज कराता है, उसे 400 रुपये के वाउचर्स दिए जाएंगे। इसके अलावा 300 रुपये का कैशबैक वॉलेट में दिया जाएगा।
जियो कैशबैक ऑफर के तहत जो वाउचर जियो यूजर्स को दिए जाएंगे, उसके एक वाचउर की कीमत 50 रुपये होगी। इस तरह के आठ वाचउर जियो यूजर्स को मिलेंगे। इस तरह से इसकी कुल कीमत 400 रुपये हो जाएगी। जियो यूजर्स इन वाचउर का लाभ अगले रिचार्ज पर myjio एप के जरिए से रिचार्ज करा के उठा सकते हैं। अगली स्लाइड में जानिए, किन वॉलेट्स में मिल रहा है जियो कैशबैक ऑफर का कैशबैक.


यांह आपको ज्यादा cashback मिलेगा


जियो कैशबैक ऑफर के अनुसार, जिन वॉलेट्स पर इस ऑफर का फायदा मिल रहा है, उनमें मोबीक्विक, पेटीएम, अमेजन पे, फ्री रिचार्ज, फोन पे आदि शामिल हैं। मोबीक्विक पर सबसे अधिक 300 रुपये तक का कैशबैक मिल रहा है। वहीं, पेटीएम पर 50 रुपये का कैशबैक मिलेगा।

network speed


जिओ 22.3 एमबीपीएस की सर्वाधिक औसत डाउनलोड स्पीड के साथ अगस्त महीने में 4जी डाउनलोड स्पीड के मामले में अव्वल रहा जबकि इस माह में अपलोड स्पीड के मामले में आइडिया सेल्यूलर पहले स्थान पर रहा।

न्यूज एजेंसी भाषा के अनुसार, 'माई स्पीड पोर्टल पर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा जारी आंकड़ों में कहा गया है कि 4जी डाउनलोड स्पीड के मामले में जियो की राष्ट्रीय औसत गति उसके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी एयरटेल के 10 मेगाबाइट प्रति सेकेंड की तुलना में दो गुनी से भी अधिक रही।
idea आइडिया 4जी नेटवर्क की डाउनलोड गति जुलाई और अगस्त के महीने में 6.2 एमबीपीएस बनी रही। हालांकि वोडाफोन की गति में मामूली सुधार देखने के मिला है। कंपनी की डाउनलोड स्पीड जुलाई में 6.4 एमबीपीएस रही थी, जो अगस्त में बढ़कर 6.7 एमबीपीएस हो गयी।

दोनों कंपनियों ने अगस्त के आखिर में विलय प्रक्रिया पूरी होने की घोषणा की थी। वहीं 4जी अपलोड स्पीड के मामले में 5.9 एमबीपीएस के साथ आइडिया शीर्ष पर बनी हुई है।

किसी भी वीडियो को प्ले करने, ऑनलाइन गाना सुनने, इंटरनेट सर्फिंग और ईमेल के इस्तेमाल में इंटरनेट डाउनलोड स्पीड बहुत महत्व रखता है। वहीं फोटो, वीडियो और दस्तावेजों को ईमेल या सोशल मीडिया एप से साझा करने के लिए अपलोड गति का अच्छा होना जरूरी होता है। अगस्त में वोडाफोन की अपलोड स्पीड 5.1, रिलायंस जियो की 4.9 और एयरटेल की 4.4 एमबीपीएस रही।

what is SEO - on page seo,off page seo


               SEO guide(simple language)


 

SEO क्या है हिंदी में जाने 



 

Guess how many blog posts people publish each day.

Any ideas?Well, WordPress users alone publish over 2 million post every day
That comes out to 24 blog posts every second.

That means that users published around 216 blog posts while you were reading these five sentences.

And that’s only counting WordPress users. If we were to count all blog posts, that number would surely be higher.

This makes it kind of tough to stand out. But you have to if you want to make your blog a successful one.

While I often spend 4-5 hours writing my blog posts, the ten minutes I spend optimizing each post are easily the most important.

No wonder millions of people Google the term “SEO” each month.
On any given day, people conduct more than 2.2 million searches
And that’s just on Google — to say nothing of the other search engines.

Therefore, showing up on the front page of Google can be the deciding factor between a business that’s thriving and one that’s, well, bankrupt.

what is SEO


SEO stands for Search Engine Optimization, which is the practice of increasing the quantity and quality of traffic to your website through organic search engine results.

what goes into SEO


To understand what SEO really means, let's break that sentence down and look at the parts:

Quality of traffic. You can attract all the visitors in the world, but if they're coming to your site because Google tells them you're a resource for Apple computers when really you're a farmer selling apples, that is not quality traffic. Instead you want to attract visitors who are genuinely interested in products that you offer.
Quantity of traffic. Once you have the right people clicking through from those search engine results pages (SERPs), more traffic is better.
Organic results. Ads make up a significant portion of many SERPs. Organic traffic is any traffic that you don't have to pay for.

But let’s start this SEO guide at the beginning.


Deffinition:-According to Wikipedia, SEO is “the process of affecting the visibility of a website or a web page in a search engine’s unpaid results.”

Alright, let’s translate that to English. Here’s my go at it:

Search engine optimization (SEO) is the process of optimizing your online content so that a search engine likes to show it as a top result for searches of a certain keyword.

Let me break that down even further:

When it comes to SEO, there’s you, the search engine, and the searcher. If you have an article about how to make vegan lasagna, you want the search engine (which, in 90% of all cases, is Google) to show it as a top result to anyone who searches for the phrase “vegan lasagna.”

SEO is the magic you have to work on your article in order to make Google very likely to include your post as one of the top results whenever someone searches for that keyword.

We’re going to dig deep into SEO, but feel free to jump to any section that interests you:

* Overview
* White hat vs black hat
* Cleaning inside your house and outside:on-page SEO vs off page SEO
* On Page SEO
* Off Page SEO

 

Overview


     
Now what does that magic look like, and why does it even matter?

Like I said earlier, the vast majority of online experiences begin with a search engine, and nearly 75% of searches start their searches on google
Combine that with the fact that the first five result on google get 67% of all click and you get an idea of why search engine optimization is so important.

There’s a joke going around the web that highlights how crucial it is to hit the first page of Google:

If you ever need to hide a dead body, you should place it on the second page of Google search results.

If your blog post, article, or product is on any other page of the Google search results than the first, then it’s the equivalent of it not ranking at all.

But to understand how to show up first in the search engine results, you first need to know how search even works.

How Search Works:

Now that you have an idea of the basics of SEO, I’ll take a look at some of its components in detail.

While Google guards their search algorithm pretty well and not all of the over 200 determining factors are public Backlinko did a great job of compiling as many of them as possible into one big list.
But first, I need to get one thing straight. There are two sides of the SEO force, and you need to choose yours right now.

white hat vs black hat


It’s the same with search engine optimization. Some people are in it to make a few grand really quickly while others are in it for the long haul.

If you want to work SEO like a get-rich-quick scheme, you’ll probably end up doing black hat SCO.This type of SEO focuses on optimizing your content only for the search engine, not considering humans at all. Since there are lots of ways to bend and break the rules to get your sites to rank high, these are a prime way for black hat SEOs to make a few thousand dollars fast.

Ultimately, this approach results in spammy, crappy pages that often get banned very fast. It will often lead to severe punishment for the marketer, ruining their chance of building something sustainable in the future.

You might make a few grand this way, but you’ll continuously have to be on the lookout for search engine updates and come up with new ways to dodge the rules.

White hat SEO, on the other hand, is the way to build a sustainable online business. If you do SEO this way, you’ll focus on your human audience.

You’ll try to give them the best content possible and make it easily accessible to them by playing according to the search engine’s rules

 

 

ON page SEO


On-site SEO (also known as on-page SEO) is the practice of optimizing elements on a website (as opposed to links elsewhere on the Internet and other external signals collectively known as
" off page SEO" in order to rank higher and earn more relevant traffic from search engines. On-site SEO refers to optimizing both the content and HTML source code of a page.

Beyond helping search engines interpret page content, proper on-site SEO also helps users quickly and clearly understand what a page is about and whether it addresses their search query. In essence, good on-site SEO helps search engines understand what a human would see (and what value they would get) if they visited a page, so that search engines can reliably serve up what human visitors would consider high-quality content about a particular search query (keyword).

The ultimate goal of on-site SEO can be thought of as attempting to make it as easy as possible for both search engines and users to:

Understand what a webpage is about;
Identify that page as relevant to a search query or queries
Find that page useful and worthy of ranking well on a search engine results page (SERP).

Off page SEO


"Off-page SEO" refers to actions taken outside of your own website to impact your rankings within search engine results pages (SERPs).

Sunday, March 3, 2019

digi locker - digital locker create account ,signup,uses,upload document



 

                           डिजिटल लॉकर क्या है 


digi locker,sing up

आजकल चारों ओर केवल डिजिटल लॉकर की बातें हो रही हैं, लोग इस लॉकर को खुलवाने के लिए होड़ मचाये हुए हैं, लेकिन आखिर है क्या डिजिटल लॉकर?
आईये जानते हैं.. दरअसल डिजिटल लॉकर , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस वेब सेवा के जरिये आप जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाण पत्र जैसे अहम दस्तावेजों को ऑनलाइन स्टोर कर सकते हैं। यह सुविधा पाने के लिए बस आपके पास आधार कार्ड होना चाहिए। आधार का नंबर फीड कर आप डिजीटल लॉकर अकाउंट खोल सकते हैं।

खास बात 


इस सर्विस की सबसे खास बात यह है कि आप कहीं भी अपने दस्तावेज में आप डिजिटल लिंक पेस्ट कर दीजिये,अब आपको बार-बार कागजों का प्रयोग नहीं करना होगा। डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (डीईआईटीवाई) ने हाल ही में डिजिटल लॉकर का बीटा वर्जन लॉन्च किया है।

कैसे बनाये  लॉकर


 

 










digi locker,sign up



 

आप भी अगर लॉकर खोलना चाहते हैं तो यह बहुत आसान है, बस आपको https://digilocker.gov.in/public/websignup#! लागइन करना होगा, उसके बाद आपको आईडी बनानी होगी। उसके बाद आपको आधार कार्ड नंबर लॉग इन कर दीजिये। उसके बाद आपसे जुड़े कुछ सवाल आपसे पूछे जायेंगे जिसके बाद आपका अकाउंट बन जायेगा और उसके बाद आप उसमें सारे निजी दस्तावेज डाउनलोड कर दीजिये, जो हमेशा के लिए उसमें लोड हो जायेगा। आपका लाग इन आईडी और पासवर्ड आपका अपना होगा जिसे आप कहीं भी खोल सकते हैं।

इस लॉकर के जरिये धोखाधड़ी नहीं हो सकती है और ना ही नकली दस्तावेजों का चक्कर होता है, यह पूरी तरह से नीट एंड क्लीन प्रोसेस है।

सुविधाये 


डिजिटल लॉकर की सबसे बड़ी सुविधा ये हैं कि उपयोगकर्ता कहीं से भी और कभी भी अपने दस्तावेजों को इसके जरिए जमा कर सकते हैं। उन्हें निशुल्क सुरक्षित रख सकते हैं, किसी भी सरकारी काम जहाँ दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियाँ देना अनिवार्य होता है वहाँ मूलप्रति या उसकी छायाप्रति देने की बज़ाय अपने लॉकर का url दे सकते हैं। अधिकारी वहाँ से इन प्रमाणपत्रों को देख सकते हैं। इस तरह से भारतीय नागरिकों को हर जगह अपने ज़रूरी दस्तावेज लेकर घूमने की जरूरत नहीं है।

डिजिटल लॉकर स्कीम में हर भारतीय जिसके पास सरकार द्वारा ज़ारी अपना आधार अंक है अपने एकेडेमिक, चिकित्सकीय रिकॉर्ड,पासपोर्ट   जैसे दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में यहाँ सरकार की निगरानी में रख सकता है। यहाँ दस्तावेजों के डिजिटल स्वरूप से मतलब उनका चित्र है। मूल मुद्रित प्रति तो उस व्यक्ति के पास ही रहेगी, सिर्फ उसकी छायाप्रति ही वेबसाइट पर रखनी होगी। इसको ही डिज़िटल स्वरूप कहते हैं। डिजिटल लॉकर अधिकृत उपभोक्ताओं/ एजेंसियों को किसी भी समय और कहीं भी अपने दस्तावेजों को सुरक्षित तरीके से अपलोड और साझा करने की सहूलियत देता है।

 

shivneri shivaji birth place


                        शिवनेरी





 












shivaneri

 

 

 

 

 


शिवनेरी हा भारतातील महाराष्ट्र राज्यात एक किल्ला  आहे.  शिवनेरीचा हा प्राचीन किल्ला महाराष्ट्र राज्यात जुन्नर गावाजवळ, पुण्यापासून अंदाजे १०५ किलोमीटरवर आहे. भारत सरकारने या किल्ल्याला दिनांक २६ मे, इ.स. १९०९ रोजी महाराष्ट्रातील राष्ट्रीय  संरक्षित स्मारक  म्हणून घोषित केलेले आहे. १९ फेब्रुवारी १६३० रोजी छत्रपती शिवाजी  महाराजांचा जन्म शिवनेरी गडावर झाला होता.हा किल्ला खूप प्रसिद्ध आहे.shivneri shivaji birth place

या किल्ल्याला चारही बाजूंनी कठीण चढाव असून त्याला जिंकावयास कठीण असा बालेकिल्ला आहे. किल्ल्यावर शिवाई देवीचे छोटे मंदिर व जिजाबाई  व बाल-शिवाजी यांच्या प्रतिमा  आहेत. shivneri shivaji birth place

या किल्ल्याचा आकार शिवशंकराच्या  पिंडीसारखा आहे.


शिवनेरी अगदी जुन्नर गावात आहे. जुन्नरमधे शिरतानाच शिवनेरीचे दर्शन होते. किल्ला तसा फार मोठा नाही. १६७३मध्ये ईस्ट इंडिया कंपनीतील डॉ. जॉन फ्रायर याने या किल्ल्याला भेट दिली होती. त्याने आपल्या साधनग्रंथात, या किल्ल्यावर हजार कुटुंबांना सात वर्षे पुरेल एवढी शिधासामुग्री आहे असा उल्लेख केला आहे.shivneri shivaji birth place


इतिहास  


‘जीर्णनगर’, ‘जुन्नेर’ म्हणजेच जुन्नर  हे गाव इसवी सन पूर्व काळापासून प्रसिद्ध आहे. ही शक राजा नहपानाची राजधानी होती.सातवाहन  राजा गौतमीपुत्र सातकर्णी याने शकांचा नाश केला आणि जुन्नर व येथील सर्व परिसरावर आपले वर्चस्व प्रस्थापित केले.नाणेघाट  हा पुरातन व्यापारी मार्ग. या मार्गावरून फार मोठ्या प्रमाणात वाहतूक चालत असे. यावर नजर ठेवण्यासाठी या मार्गावरील दुर्गांची निर्मिती करण्यात आली. सातवाहनांची सत्ता स्थिरावल्यानंतर त्यांनी येथे अनेक ठिकाणी लेणी खोदवून घेतली.shivneri shivaji birth place


सातवाहनांनंतर शिवनेरी चालुक्य व राष्ट्रकुट  या राजवटींच्या सत्तेखाली होता. ११७० ते १३०८ च्या सुमारास यादवांनी येथे आपले राज्य स्थापन केले. आणि याच काळात शिवनेरीला गडाचे स्वरूप प्राप्त झाले. नंतर इ.स. १४४३ मध्ये मलिक– उल–तुजार याने यादवांचा पराभव करून किल्ला सर केला. अशा प्रकारे किल्ला  बहमनी राजवटीखाली आला. इ.स. १४७० मध्ये मलिक– उल–तुजारचा प्रतिनिधी मलिक महंमद याने किल्ला नाकेबंद करून पुन्हा सर केला. १४४६ मध्ये मलिक महंमदच्या वडिलांच्या मृत्यूनंतर निजामशाहीची स्थापना झाली. पुढे १४९३ मध्ये इथली राजधानी गडावरून अहमदनगरला हलवण्यात आली. इ.स. १५६५ मध्ये सुलतान मूर्तिजा निजामाने आपला भाऊ कासीम याला या गडावर कैदेत ठेवले होते.shivneri shivaji birth place

1995


यानंतर इ.स. १५९५ मध्ये किल्ला व जुन्नर प्रांत मालोजी राजे भोसले यांच्याकडे आला. जिजाबाईंचे वडील जाधवराव यांच्या हत्येनंतर १६२९ मध्ये जिजामाता  गरोदर असताना शहाजीने त्यांना ५०० स्वार त्यांच्या सोबत देऊन रातोरात शिवनेरीवर नेले. ‘शिवनेरी गडावर श्रीभवानीमाता शिवाई ला जीजाऊने नवस केला जर आपल्याला पुत्र झाला तर तुझें नाव ठेवीन. त्याउप्पर, शके १५५१ शुक्ल नाम संवत्सरे, फाल्गुन वद्य तृतीयेला, शुक्रवारी सूर्यास्तानंतर शिवाजीराजे  यांचा जन्म जाला. तारीख होती १९ फेब्रुवारी, इसवी सन १६३०. इ.स. १६३२ मध्ये जिजाबाईने शिवाजीसह गड सोडला आणि १६३७ मध्ये किल्ला मोगलांच्या ताब्यात गेला. १६५० मध्ये मोगलांविरूद्ध येथील महादेव कोळ्यांनी बंड केले.shivneri shivaji birth place

यात मोगलांचा विजय झाला. पुढे इ.स. १६७३ मध्ये शिवनेरीचा किल्लेदार अजीजखान याला फितवून किल्ल्याला माळ लावून सर करण्याचा अयशस्वी प्रयत्‍न राजे शिवाजीने केला. इ.स. १६७८ मध्ये जुन्नर प्रांत लुटला गेला आणि मराठ्यांनी किल्ला घेण्याचा परत एकदा प्रयत्‍न केला, मात्र अपयश पदरात पडले. पुढे ३८ वर्षांनंतर १७१६ मध्ये शाहूमहाराजांनी किल्ला मराठेशाहीत आणला व नंतर तो पेशव्यांकडे हस्तांतरित करण्यात आला.shivneri shivaji birth place

कोळी चौथरा


शिवाजी महाराजांच्या पुणे परिसरातील कारवाया आदिलशाहीला खुपत होत्या. मोगलांना जरी त्या ठाऊक असल्या तरी अजून त्यांना त्याचा थेट उपसर्ग होत नव्हता. त्याच सुमाराला काही महादेव कोळी लोकांनी मोगलांविरुद्ध आघाडी उघडून जुन्नर व शिवनेरीचा ताबा घेतला. ह्यापूर्वी हा भाग निजामशाहीकडे होता. निजामशाही पडल्यानंतर सीमाभागाकडे आदिलशाहीचे व मोगलांचे थोडे दुर्लक्ष होत होते. कदाचित ह्याचा फायदा घेऊन ह्या महादेव कोळ्यांनी त्या प्रांतावर अधिकार स्थापित केला असावा.shivneri shivaji birth place

मोगलांनी ह्यावर लगेच उपाययोजना करण्यासाठी व महादेव कोळ्यांना परास्त करण्यासाठी एक भली मोठी फौज पाठवली. शिवनेरीला वेढा पडला व लवकरच महादेव कोळ्यांच्या नवख्या सैन्याने बलाढ्य मोगल सैन्यापुढे नांगी टाकली. सुमारे १५०० महादेव कोळ्यांना जेरबंद करण्यात आले. त्यांचे अतोनात हाल करून नंतर माथ्यावरच्या एका चौथऱ्यावर त्यांचा शिरच्छेद करण्यात आला. ह्या नरसंहाराची आठवण म्हणून आज त्या चौथऱ्याला कोळी चौथरा म्हणतात. नंतर त्या चौथऱ्यावर एक घुमटी बांधली गेली व त्यावर पारसीमधे दोन शिलालेखदेखील आहेत. दुर्दैवाने आज त्या महादेव कोळ्यांची किंवा त्यांच्या म्होरक्याची नावे उपलब्ध नाहीत.shivneri shivaji birth place


गडावर जाण्याच्या वाटा



 


गडावर जाण्याच्या दोन प्रमुख वाटा जुन्नर गावातूनच जातात. पुणेकरांना तसेच मुंबईकरांना एका दिवसात शिवनेरी पाहून घरी परतता येते.

साखळीची वाट :

या वाटेने गडावर यायचे झाल्यास जुन्नर शहरात शिरल्यानंतर नव्या बसस्टँड समोरील रस्त्याने शिवाजीच्या पुतळ्यापाशी यावे. येथे चार रस्ते एकत्र मिळतात. डाव्या बाजूस जाणार्‍या रस्त्याने साधारणतः एक किलोमीटर गेल्यावर रस्त्याच्या उजव्या कडेला एक मंदिर लागते. मंदिरासमोरून जाणारी मळलेली पायवाट थेट शिवनेरी किल्ल्याच्या एका कातळभिंतीपाशी घेऊन जाते. भिंतीला लावलेल्या साखळीच्या आणि कातळात खोदलेल्या पायर्‍यांच्या साह्याने वर पोहचता येते. ही वाट थोडी अवघड असून गडावर पोहचण्यास पाऊण तास लागतो.

सात दरवाज्यांची वाट :


शिवाजीच्या पुतळ्यापासून डाव्या बाजूच्या रस्त्याने चालत सुटल्यास डांबरी रस्ता आपणास गडाच्या पायर्‍यार्‍यांपाशी घेऊन जातो. या वाटेने गडावर येताना सात दरवाजे लागतात. पहिला महादरवाजा, दुसरा पीर दरवाजा, तिसरा परवानगीचा दरवाजा, चौथा हत्ती दरवाजा, पाचवा शिपाई दरवाजा, सहावा फाटक दरवाजा आणि सातवा कुलाबकर दरवाजा. या मार्गे किल्ल्यावर पोहचण्यासाठी दीड तास लागतो.shivneri shivaji birth place


सिंहगड (कोंढाणा) sinhagad killa - माहिती,ठिकाण,फोटो,इतिहास,स्मारके


                       सिंहगड ( कोंढाणा)


 
















सिंहगड




सिंहगड हा भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील एक किल्ला आहे.पुण्याच्या  नैर्ऋत्येला साधारण २५ कि.मी अंतरावर असणारा हा किल्ला समुद्रसपाटीपासून सुमारे ४४०० फूट उंच आहे.सह्याद्रीच्या पूर्व शाखेवर पसरलेल्या भुलेश्वरच्या रांगेवर हा गड आहे. दोन पायऱ्यासारखा दिसणारा खंदकाचा भाग आणि दूरदर्शनचा उभारलेला मनोरा यामुळे पुण्यातून कुठूनही तो लक्ष वेधतो.पुरंदर,राजगड,लोहगड,तोरणा,विसापूर,तुंग,असा प्रचंड मुलुख या गडावरून दिसतो.sinhagad killa

इतिहास


याचे आधीचे नाव कोंढाणा. पूर्वी हा किल्ला आदिलशाही होता. [[दादोजी कोंडदेव]] हे आदिलशाहीकडून सुभेदार म्हणून नेमले होते. पुढे इ.स.१६४७ मध्ये गडावर आपले लष्करी केंद्र बनवले. पुढे [[इ.स. १६४९]] मध्ये शहाजी राजे यांच्या सुटकेसाठी शिवाजी राजांनी हा किल्ला परत आदिलशहाला दिला. पुरंदरच्या तहात जे किल्ले मोगलांना दिले त्यामध्ये कोंडाणापण होता. मोगालातर्फे उदेभान राठोड हा कोंडाण्यावरचा अधिकारी होता. हा मूळचा राजपूत पण नंतर मुसलमान झाला होता.सिंहगडचे मूळ नाव कोंढाणा तानाजी मालुसरे आणि त्यांच्या मावळ्यांनी (मावळ प्रांतातून भरती झालेल्या सैनिकांनी) हा किल्ला एका चढाई दरम्यान जिंकला. या लढाईत तानाजींना वीरमरण आले आणि प्राणाचे बलीदान देऊन हा किल्ला जिंकल्यामुळे शिवाजी महाराजांनी "गड आला पण सिंह गेला" हे वाक्य उच्चारले. पुढे त्यांनी गडाचे कोंडाणा हे नाव बदलून सिंहगड असे ठेवले. सिंहगड हा मुख्यतः तानाजी मालुसरे यांच्या बलिदानामुळे प्रसिद्ध आहे.sinhagad killa

 

बखरीत खालीलप्रमाणे उल्लेख आहे.


तानाजी मालुसरा म्हणून हजारी मवळियांचा होता. त्याने कबूल केले की, 'कोंडाणा आपण घेतो', असे कबूल करून वस्त्रे, विडे घेऊन गडाचे यत्नास ५०० माणूस घेऊन गडाखाली गेला. आणि दोघे मावळे बरे, मर्दाने निवडून रात्री गडाच्या कड्यावरून चढवले. गडावर उदेभान राठोड होता. त्यास कळले की, गनिमाचे लोक आले. ही खबर कळून कुल रजपूत कंबरकस्ता होऊन, हाती तोहा बार घेऊन, हिलाल (मशाल), चंद्रज्योती लावून बाराशे माणूस तोफाची व तिरंदाज, बरचीवाले, चालोन आले. तेव्हा मावळे लोकांनी फौजेवर रजपुतांचे चालून घेतले. मोठे युद्ध एक प्रहर झाले. पाचशे रजपूत ठार जाले. sinhagad killa

उदेभान किल्लेदार खाशा त्याशी व तानाजी मालुसरा यांशी गाठ पडली. दोघे मोठे योद्धे, महशूर, एक एकावर पडले. तानाजीचे डाव्या हाताची ढाल तुटली. दुसरी ढाल समयास आली नाही. मग तानाजीने आपले डावे हाताची ढाल करून त्याजवर वोढ घेऊन, दोघे महरागास पेटले. दोघे ठार झाले. मग सूर्याजी मालुसरा  (तानाजीचा भाऊ), याने हिंमत धरून, कुल लोक सावरून उरले राजपूत मारिले. किल्ला काबीज केला.शिवाजी महाराजांना गड जिंकल्याची पण तानाजी पडल्याची बातमी मिळाली तेव्हा ते म्हणाले, 'गड आला, पण सिंह गेला'. माघ वद्य नवमी दि. ४ फेब्रुवारी १६७२ च्या रात्री हे युद्ध झाले.sinhagad killa
 

सिंहगडावरील माहितीफालाकानुसार


सिंहगडाचे मूळचे नाव कोंढाणा, इसामी नावाच्या कवीने फुतुह्स्सलातीन किंवा शाहनामा-इ-हिंद या फार्शी काव्यात (इ. १३५०) मुछ्म्द तुघलकाने इ.१६२८ मध्ये कुंधीयाना किल्ला घेतल्याची माहिती येते. त्यावेळेस हा किल्ला नागनायक नावाच्या कोळ्याच्या ताब्यात होता.
अहमदनगरच्या निजामशाही कारकिर्दीतील कोंढाण्याचे उल्लेख इ.१४८२, १५५३, १५५४ व १५६९ च्या सुमारसचे आहेत. इ.१६३५ च्या सुमारास कोंढाण्यावर सीडी अवर किल्लेदार असताना मोगल व आदिलशाह यांनी मिळून कोंढाणा घेतला. यावेळेस (इ.१६३६) आदिलशाहचा खजिना डोणज्याच्या खिंडीत निजामाचा सरदार मुधाजी मायदे याने लुटला. 
शहाजी राज्यांच्या काळात सुभेदार दादोजी कोंडदेव मालवणकर यांच्या ताब्यात कोंढाणा असल्याचा उल्लेख आदिलशाही फर्मानात आहे.sinhagad killa


दादोजी कोंडदेव आदिलशाहीचे नोकर असले तरी ते शहाजी राजांशी एकनिष्ठ असल्याने शिवाजी राजांनी त्यांच्या मृत्यूपर्यंत (इ.१६४७) कोंढाणा घेण्याचा प्रयत्‍न केला नाही. त्यानंतर लगेचच हा गड राजांनी ताब्यात घेतला. sinhagad killa

 


 

गडावरील ठिकाणे


दारूचे कोठार : दरवाजातून आत आल्यावर उजवीकडे जी दगडी इमारत दिसते तेच दारू कोठार. दि. ११ सप्टेंबर १७५१ मध्ये या कोठारावर वीज पडली. ह्या अपघातात गडावरील त्यावेळच्या फडणिसांचे घर उद्‌ध्वस्त होऊन घरातील सर्व माणसे मरण पावली.sinhagad killa

टिळक बंगला : रामलाल नंदराम नाईक यांच्याकडून खरेदी केलेल्या जागेवरच्या ह्या बंगल्यात बाळ गंगाधर टिळक येत असत. १९१५ साली महात्मा गांधी व लोकमान्य टिळक यांची भेट याच बंगल्यात झाली.sinhagad killa

कोंढाणेश्वर : हे मंदिर शंकराचे असून ते यादवांचे कुलदैवत होते. आत एक पिंडी व सांब असणारे हे मंदिर यादवकालीन आहे.sinhagad killa

श्री अमृतेश्वर भैरव मंदिर' : कोंढाणेश्वराच्या मंदिरावरून थोडे पुढे गेले की डावीकडे हे अमृतेश्वराचे प्राचीन मंदिर लागते. भैरव हे कोळ्यांचे दैवत आहे. यादवांच्या आधी ह्या गडावर कोळ्यांची वस्ती होती. मंदिरात भैरव व भैरवी अशा दोन मूर्ती दिसतात. भैरवाच्या हातात राक्षसाचे मुंडके आहे.sinhagad killa

देवटाके : तानाजी स्मारकाच्या मागून डाव्या हाताच्या छोटा तलावाच्या बाजूने डावीकडे गेल्यावर हे प्रसिद्ध असे देवटाके लागते. या टाक्याचा उपयोग पिण्याचे पाणी म्हणून होत असे व आजही होतो. महात्मा गांधी जेव्हा पुण्यास येत तेव्हा मुद्दाम ह्या टाक्याचे पाणी मागवत असत.sinhagad killa

कल्याण दरवाजा 


: गडाच्या पश्चिमेस हा दरवाजा आहे. कोंढणपूरवरून पायथ्याच्या कल्याण गावातून वर आल्यास ह्या दरवाजातून आपला प्रवेश होतो. हे एकामागोमाग असे दोन दरवाजे आहेत. यापैकी वरच्या दरवाज्याच्या दोन्हीकडील बुरुजांच्या भिंतीत अर्धवट बाहेर आलेला हत्ती व माहूत अशी दगडी शिल्पे होती. श्रीशालिवाहन शके १६७२ कारकीर्द श्रीमंत बाळाजी बाजीराव पंडित प्रधान असा शिलालेख आढळतो.sinhagad killa

उदेभानाचे स्मारक : दरवाजाच्या मागच्या बाजूस वर असलेल्या टेकडीवर यावे. येथे जो चौकोनी दगड आहे तेच उदेभान राठोडचे स्मारकचिन्ह म्हणून ओळखले जाते. मोगलांतर्फे उदेभान हा सिंहगडचा अधिकारी होता. झुंजारबुरूज : झुंजारबुरूज हे गडचे दक्षिण टोक होय. उदयभानूच्या स्मारकापुढून समोरची टेकडी उतरून या बुरुजावर येता येते. येथून समोरच टोपीसारखा राजगड, त्याच्याच उजवीकडे तोरणा हे गड दिसतात तर खाली पानशेतचे खोरे दिसते. पूर्वेकडे लांबवर पुरंदर दिसतो.sinhagad killa

डोणगिरीचा उर्फ तानाजी कडा : झुंजारबुरूजावरून मागे येऊन तटाच्या भिंतीच्या बाजूने पायवाटेने तानाजीच्या कडाकडे जाता येते. हा कडा गडाच्या पश्चिमेस आहे.येथूनच तानाजी मावळ्यांसह वर चढला.sinhagad killa

राजाराम स्मारक : राजस्थानी पद्धतीची रंगीत देवळासारखी जी घुमटी दिसते तीच छत्रपती राजाराम महाराज यांची समाधी. मोगली फौजेला सतत ११ वर्षे टक्कर देणाऱ्याा राजाराम महाराजांचे वयाच्या अवघ्या ३०व्या वर्षी शनिवार दि.२ मार्च इ.स.१७०० या दिवशी सिंहगडावर निधन झाले. पेशव्यांतर्फे या स्मारकाची उत्तम व्यवस्था ठेवली जायची.sinhagad killa

तानाजीचे स्मारक : अमृतेश्वराच्या मागच्या बाजूने वर गेल्यावर डाव्या बाजूस सुप्रसिद्ध तानाजीचे स्मारक दिसते. ‘तानाजी स्मारक समितीच्या’ वतीने हे बांधण्यात आले आहे. माघ वद्य नवमी दि. ४ फेब्रुवारी १६७२ या दिवशी झालेल्या लढाईत तानाजी मारला गेला. दरवर्षी माघ नवमीस येथे मंडळातर्फे तानाजीचा स्मृतिदिन साजरा केला जातो.sinhagad killa